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Sat, February 07, 2026
केंद्र सरकार ने हाल के महीनों में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के फर्जी बिलों से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों को रोकने के लिए ...
केंद्र सरकार ने हाल के महीनों में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के फर्जी बिलों से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं। फर्जी तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाने वाली कई कंपनियों पर हाल के दिनों में कार्रवाई की गई है।
नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। केंद्र सरकार ने हाल के महीनों में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के फर्जी बिलों से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं। फर्जी तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाने वाली कई कंपनियों पर हाल के दिनों में कार्रवाई की गई है। साथ ही इसमें संलिप्त लोगों को गिरफ्तार किया गया है। राजस्व विभाग के अंतर्गत काम करने वाले सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स (CBIC) ने इस फर्जीवाड़े की समस्या को दूर करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके बाद अब CBIC ने नियमों में परिवर्तन को लेकर पैदा हुई गलतफहमियों को दूर करने के लिए 'मिथक और वास्तविकता' के नाम से कुछ विवरण साझा किए हैं।
मिथकः अगर उचित अधिकारी को यह लगता है कि रजिस्ट्रेशन रद्द किए जाने का मामला बनता है तो व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का कोई मौका नहीं दिया जाएगा।
वास्तविकताः संसद और राज्य की विधानसभाओं द्वारा पारित जीएसटी कानून के मुताबिक जिन लोगों ने छह या उससे ज्यादा रिटर्न फाइल नहीं किए हैं, उनका जीएसटी रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है। ऐसे में यह कहना गलत होगा कि बिना किसी कारण के जीएसटी रजिस्ट्रेशन को रद्द किया जा सकता है। राजस्व एकत्रित करने के लिए इसका प्रावधान किया गया है ताकि फर्जीवाड़ा करने वाले अपने ग्राहकों से एकत्रित जीएसटी को लेकर भाग ना जाएं। सीबीआईसी ने साथ ही कहा है कि किसी भी टैक्सपेयर को अपना पक्ष रखने का उचित मौका दिए बगैर किसी का भी रजिस्ट्रेशन कैंसल नहीं किया जाएगा।
मिथकः रिटर्न फाइल करने में किसी भी तरह की लिपिकीय त्रुटि करने पर GSTIN कैंसल हो जाएगा। आपकी गलती को सही करने के लिए कोई विकल्प मौजूद नहीं है।
वास्तविकताः सीबीआईसी ने कहा है कि यह सच नहीं है। सीबीआईसी ने कहा है कि केवल लिपिकीय त्रुटि होने पर नहीं बल्कि डेटा एनालिटिक्स में बहुत अधिक अनियमितता पाए जाने और बहुत अधिक जोखिम की आशंका होने पर फर्जीवाड़े वाले मामले में GSTIN को सस्पेंड करने या कैंसल करने की कार्रवाई की जाएगी। सीबीआईसी ने कहा है कि जीएसटी इकोसिस्टम टैक्सपेयर्स के हित में फर्जी बिल के जरिए होने वाले फर्जीवाड़ो को रोकने के लिए काफी सतर्कता से काम कर रहा है। इस तरह की धोखाधड़ी करने वालों को यह BIFA, डेटा एनालिटिक्स और AI & ML के जरिए जरिए चिह्नित करता है।
मिथकः प्रस्तावित बदलावों से कारोबार सुगमता पर असर पड़ेगा।
वास्तविकताः यह बात भी सही नहीं है। फर्जीवाड़ा करने वाले सिस्टम का दुरुपयोग वास्तविक करदाताओं के हितों को नुकसान पहुंचाने के लिए कर रहे हैं। ऐसे में डेटा के आधार पर फर्जीवाड़ा करने वालों को लक्षित करना वक्त की जरूरत है। आयकर विभाग, बैंक, ग्राहकों से डेटा लिया जा रहा है और फर्जीवाड़ा करने वालों को चिह्नित करने के लिए डेटा को अनिवार्य तौर पर मैच किया जा रहा है। इसके बाद कानूनी प्रक्रियाओं के तहत जीएसटी नंबर रद्द करने या निलंबित करने की कार्रवाई की जा रही है। फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई से कारोबार सुगमता पर असर नहीं पड़ेगा।
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