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Sat, February 07, 2026
चार वर्ष पहले वो शरणार्थी बन कर अपने पति हम्मल हैदर के साथ कनाडा के टोरंटो शहर आ गई थीं. रविवार दोपहर को करीमा बलोच अचान...
चार वर्ष पहले वो शरणार्थी बन कर अपने पति हम्मल हैदर के साथ कनाडा के टोरंटो शहर आ गई थीं. रविवार दोपहर को करीमा बलोच अचानक लापता हो गईं. उनके पति ने पुलिस में रिपोर्ट लिखवाई, लेकिन सोमवार 21 दिसंबर को करीमा का शव टोरंटो में एक झील के किनारे मिला. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से रक्षा का वचन मांगने वाली करीमा बलोच अब इस दुनिया में नहीं हैं.
नई दिल्ली: अब आपको एक ऐसी महिला की रहस्यमयी मौत के बारे में बताएंगे जिसने 4 वर्ष पहले प्रधानमंत्री मोदी को अपना भाई माना था और रक्षा बंधन के दिन उनसे रक्षा का वचन लिया था. इस महिला का नाम है करीमा बलोच जिन्होंने वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को रक्षाबंधन के दिन एक वीडियो संदेश भेजा था.
15 अगस्त 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से बलूचिस्तान के लोगों का शुक्रिया अदा किया था. करीमा पाकिस्तान के प्रांत बलोचिस्तान की ही रहने वाली थीं और पाकिस्तान से अपनी मातृभूमि को स्वतंत्र कराने की लड़ाई लड़ रही थीं.
चार वर्ष पहले वो शरणार्थी बन कर अपने पति हम्मल हैदर के साथ कनाडा के टोरंटो शहर आ गई थीं. रविवार दोपहर को करीमा बलोच अचानक लापता हो गईं. उनके पति ने पुलिस में रिपोर्ट लिखवाई, लेकिन सोमवार 21 दिसंबर को करीमा का शव टोरंटो में एक झील के किनारे मिला. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से रक्षा का वचन मांगने वाली करीमा बलोच अब इस दुनिया में नहीं हैं.
इस संदेश से 4 दिन पहले यानी 15 अगस्त 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लालकिले से बलूचिस्तान के लोगों का शुक्रिया अदा किया था. करीमा पाकिस्तान के प्रांत बलोचिस्तान की ही रहने वाली थीं और पाकिस्तान से अपनी मातृभूमि को स्वतंत्र कराने की लड़ाई लड़ रही थीं.
चार वर्ष पहले वो शरणार्थी बन कर अपने पति हम्मल हैदर के साथ कनाडा के टोरंटो शहर आ गई थीं. रविवार दोपहर को करीमा बलोच अचानक लापता हो गईं. उनके पति ने पुलिस में रिपोर्ट लिखवाई. लेकिन कल यानी सोमवार को करीमा का शव टोरंटो में एक झील के किनारे मिला. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से रक्षा का वचन मांगने वाली करीमा बलोच अब इस दुनिया में नहीं हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रक्षाबंधन का संदेश भेजने के बाद से करीमा बलोच पाकिस्तान की सेना और ISI के निशाने पर थीं. ऐसे में सवाल है क्या करीमा बलोच को प्रधानमंत्री मोदी से रक्षा का वचन मांगने की सज़ा मिली है?
पाकिस्तान की सेना बलूचिस्तान के लोगों पर कई दशकों से अत्याचार कर रही है. करीमा बलोच पाकिस्तान की सरकार और सेना के खिलाफ आवाज़ उठाती थीं. पाकिस्तान की सेना के अत्याचार को दुनिया के सामने सबूतों के साथ रखती थीं. बलूचिस्तान की आजादी के आंदोलन से से जुड़े लोग करीमा बलोच की मौत के लिए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं.
इससे पहले भी BALOCH NATIONAL MOVEMENT के कार्यकर्ता की विदेश में संदिग्ध मौत हुई है. इसी वर्ष मार्च में The Balochistan Post के chief editor साजिद हुसैन स्वीडन में लापता हुए थे और बाद में उनका भी शव मिला था.
करीमा बलोच की संदिग्ध मौत का सच पता करने के लिए हमारे सहयोगी चैनल Wion ने Toronto Police से बातचीत की. इस बातचीत में Toronto Police ने बताया है कि वो करीमा बलोच की मौत को संदिग्ध नहीं मान रही है और इस मामले की जांच आपराधिक एंगल से नहीं कर रही है.
करीमा बलोच 37 वर्ष की थीं. वो Baloch Students Organization की अध्यक्ष बनने वाली पहली महिला थीं. उन्होंने बलूचिस्तान में महिला अधिकारों के लिए भी काम किया था. वर्ष 2016 में दुनिया की 100 सबसे प्रभावशाली महिलाओं में करीमा बलोच का नाम भी शामिल था. उन्होंने Balochistan में हो रहे मानवाधिकार हनन का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र की बैठकों में कई बार उठाया.
करीमा बलोच ने वर्ष 2016 में Zee News से बातचीत की थी. इस बातचीत में उन्होंने पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसी ISI पर गंभीर आरोप लगाए थे. अपनी जान को ख़तरा बताया था.
बलूचिस्तान में आजादी की लड़ाई का इतिहास बहुत पुराना है. वर्ष 1947 में पाकिस्तान ने बलूचिस्तान पर कब्जा किया था. तब से लेकर आज तक बलूचिस्तान की आजादी के लिए आंदोलन हो रहे हैं. इन आंदोलनों को दबाने के लिए पाकिस्तानी सेना वर्षों से क्रूरता की सारी हदें पार करती आई है.
Human Rights Council of Balochistan की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2017 में 11 सौ लोग लापता हो गए थे.
Baloch National Movement नाम की संस्था के मुताबिक, जुलाई 2019 में पाकिस्तान की सेना ने बलूचिस्तान में 80 बार सैन्य कार्रवाई की थी.
बलोच नेताओं के मुताबिक, पिछले एक दशक में करीब पांच हजार से अधिक लोग लापता हो चुके हैं.
बलूचिस्तान में अक्सर लापता लोगों के परिवार वाले प्रदर्शन करते हैं. वो सरकार से लापता लोगों की जानकारी देने की मांग करते हैं. पाकिस्तान की सेना पर लापता लोगों के परिवार वाले आरोप लगाते हैं कि सेना सरकार का विरोध करने वालों को अपने साथ ले जाती है और उनकी हत्या कर देती है.
पाकिस्तान, कश्मीर में आजादी की बात करता है पर अपने घर में आजाद बलूचिस्तान की मांग को कुचलता है. हजारों लोगों को मार डालता है. ऐसा ही उसने ईस्ट पाकिस्तान में किया था, पर वहां बगावत हुई और भारत की मदद के बाद बांग्लादेश का जन्म हुआ. अब एक बार फिर पाकिस्तान के नक्शे में बदलाव की जरूरत है ताकि बलूचिस्तान के लोगों पर अत्याचार रोके जाएं और बलूचिस्तान को आजादी मिले.
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